वॉयेजर मिशन: पृथ्वी से इंटरस्टेलर स्पेस तक – लॉन्च, यात्रा मार्ग, स्पीड ग्रैविटी बूस्ट, हीलियोपॉज़ पार करने की कहानी और आज कहाँ हैं वॉयेजर 1 और 2?

वॉयेजर मिशन मानव इतिहास की सबसे लंबी और ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा है। इस पोस्ट में वॉयेजर 1 और वॉयेजर 2 के लॉन्च, यात्रा मार्ग, किन-किन ग्रहों के पास से गुजरे, ग्रैविटी असिस्ट से स्पीड कैसे बढ़ाई, इंटरस्टेलर स्पेस में प्रवेश, हीलियोपॉज़ क्या है, पृथ्वी से वर्तमान दूरी और आज उनकी स्थिति क्या है – इन सभी पहलुओं को विस्तार से समझाया गया है।जानिए वॉयेजर मिशन की पूरी कहानी – लॉन्च से लेकर इंटरस्टेलर स्पेस तक की यात्रा। कैसे वॉयेजर ने बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून के पास से गुजरकर अपनी गति बढ़ाई, हीलियोपॉज़ पार किया और आज भी अंतरिक्ष में सक्रिय है।

वॉयेजर मिशन: पृथ्वी से इंटरस्टेलर स्पेस तक – लॉन्च, यात्रा मार्ग, स्पीड ग्रैविटी बूस्ट, हीलियोपॉज़ पार करने की कहानी और आज कहाँ हैं वॉयेजर 1 और 2?
NASA/JPL-Caltech - NASA Voyager website, सार्वजनिक डोमेन, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=167703 द्वारा

वॉयेजर मिशन – मानवता की सबसे लंबी अंतरखगोलीय यात्रा

जब भी मानव द्वारा बनाए गए सबसे महान अंतरिक्ष मिशनों की बात होती है, तो NASA द्वारा शुरू किया गया वॉयेजर मिशन सबसे ऊपर आता है। यह मिशन न केवल हमारे सौरमंडल के रहस्यों को उजागर करने के लिए बनाया गया था बल्कि यह मानवता का पहला ऐसा प्रयास था जिसने इंटरस्टेलर स्पेस यानी अंतरखगोलीय अंतरिक्ष में प्रवेश किया।

इस मिशन के अंतर्गत दो स्पेसक्राफ्ट भेजे गए थे –
Voyager 1
Voyager 2

इन दोनों यानों ने पृथ्वी से अरबों किलोमीटर दूर जाकर ऐसे-ऐसे ग्रहों के रहस्य उजागर किए जिनके बारे में पहले वैज्ञानिक केवल अनुमान ही लगा सकते थे।


NASA - http://nix.nasa.gov/info?id=MSFC-9141932http://mix.msfc.nasa.gov/ABSTRACTS/MSFC-9141932.html, सार्वजनिक डोमेन, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=715198 द्वारा

वॉयेजर का लॉन्च कब हुआ?

वॉयेजर मिशन की शुरुआत 1977 में हुई थी।
वॉयेजर 2 को 20 अगस्त 1977 को लॉन्च किया गया जबकि वॉयेजर 1 को 5 सितंबर 1977 को लॉन्च किया गया।

इन दोनों यानों को पृथ्वी से टाइटन IIIE रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में भेजा गया। लॉन्च के समय वैज्ञानिकों का उद्देश्य केवल बाहरी ग्रहों का अध्ययन करना था लेकिन बाद में यह मिशन मानव इतिहास की सबसे लंबी यात्रा बन गया।


वॉयेजर किन-किन ग्रहों के पास से गुजरा?

वॉयेजर मिशन का सबसे महत्वपूर्ण भाग था इसका फ्लाईबाय पाथ यानी यात्रा मार्ग।

वॉयेजर 1 का मार्ग

वॉयेजर 1 सबसे पहले गया –
➡️ Jupiter के पास (1979)
➡️ फिर पहुँचा – Saturn के पास (1980)

यहाँ से डेटा इकट्ठा करने के बाद इसे सौरमंडल के बाहर की ओर मोड़ दिया गया।


वॉयेजर 2 का मार्ग

वॉयेजर 2 ने चार ग्रहों के पास से उड़ान भरी –
➡️ Jupiter (1979)
➡️ Saturn (1981)
➡️ Uranus (1986)
➡️ Neptune (1989)

वॉयेजर 2 आज तक एकमात्र ऐसा अंतरिक्ष यान है जिसने यूरेनस और नेपच्यून का नज़दीक से अध्ययन किया है।

jupiter from voyager 1


Crescent_Saturn_as_seen_from_Voyager_1

वॉयेजर की स्पीड कैसे बढ़ाई गई?

वॉयेजर मिशन की सफलता के पीछे सबसे बड़ी तकनीक थी – ग्रैविटी असिस्ट तकनीक।

जब कोई स्पेसक्राफ्ट किसी ग्रह के पास से गुजरता है तो वह उस ग्रह की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का उपयोग करके अपनी गति बढ़ा सकता है। इसे स्लिंगशॉट इफेक्ट भी कहा जाता है।

उदाहरण के लिए –
जब वॉयेजर 1 Jupiter के पास से गुजरा, तो उसकी स्पीड में जबरदस्त वृद्धि हुई। इसके बाद Saturn के गुरुत्वाकर्षण ने उसकी गति को और बढ़ा दिया।

इसी तकनीक की मदद से वॉयेजर बिना अतिरिक्त ईंधन के सौरमंडल से बाहर निकल सका।


अंतरखगोलीय यात्रा (Interstellar Journey)

सौरमंडल के बाहर के क्षेत्र को इंटरस्टेलर स्पेस कहा जाता है।

वॉयेजर 1 ने 2012 में इंटरस्टेलर स्पेस में प्रवेश किया जबकि वॉयेजर 2 ने 2018 में।

यह वह क्षेत्र है जहाँ सूर्य का प्रभाव बहुत कम हो जाता है और अन्य तारों का प्रभाव शुरू हो जाता है।

Titan Haze


हीलियोपॉज़ क्या है?

हीलियोपॉज़ वह सीमा है जहाँ सूर्य की सौर हवा समाप्त हो जाती है और इंटरस्टेलर माध्यम शुरू हो जाता है।

वॉयेजर 1 ने 25 अगस्त 2012 को हीलियोपॉज़ पार किया।
वॉयेजर 2 ने 5 नवंबर 2018 को इस सीमा को पार किया।

यह मानव इतिहास में पहली बार था जब किसी मानव निर्मित यान ने सौरमंडल की सीमा को पार किया।


पृथ्वी से वॉयेजर की दूरी कितनी है?

आज के समय में –

वॉयेजर 1 पृथ्वी से लगभग 24 अरब किलोमीटर दूर है।
वॉयेजर 2 पृथ्वी से लगभग 20 अरब किलोमीटर दूर है।

रेडियो सिग्नल को पृथ्वी तक आने में लगभग 22 घंटे तक का समय लगता है।


अब वॉयेजर कहाँ है और उसकी स्थिति कैसी है?

आज भी दोनों वॉयेजर सक्रिय हैं लेकिन उनकी ऊर्जा धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

उनके पास मौजूद रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (RTG) उन्हें ऊर्जा प्रदान करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार 2030 के आसपास उनके अधिकांश उपकरण बंद हो सकते हैं।

इसके बावजूद वे अभी भी इंटरस्टेलर स्पेस से महत्वपूर्ण डेटा भेज रहे हैं।

वॉयेजर मिशन केवल एक वैज्ञानिक मिशन नहीं बल्कि मानवता की जिज्ञासा और साहस का प्रतीक है। NASA द्वारा भेजे गए ये दोनों यान आज भी हमारी पृथ्वी की कहानी को ब्रह्मांड में लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

यह मिशन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा और हमें यह याद दिलाता रहेगा कि मानव की खोज की भावना असीमित है।