भारत में Gold vs Silver Price History (2005–2026): 21 साल का पूरा विश्लेषण, रिटर्न, चार्ट और भविष्य की भविष्यवाणी
भारत में 2005 से 2026 तक Gold और Silver कीमतों का पूरा इतिहास, year-wise डेटा, चार्ट एनालिसिस, रिटर्न तुलना और भविष्य का आउटलुक। जानिए कौन-सा मेटल रहा बेहतर निवेश।Gold vs Silver Price in India 2005–2026: देखें पूरा ऐतिहासिक डेटा, ग्रोथ एनालिसिस, निवेश तुलना और एक्सपर्ट आउटलुक। जानिए सोना और चांदी में किसने दिए ज्यादा रिटर्न और आगे क्या हो सकता है।
भारत में सोना और चांदी सिर्फ आभूषण तक सीमित नहीं हैं। यह दोनों धातुएँ सदियों से भारतीय संस्कृति, परंपरा और निवेश व्यवस्था का अहम हिस्सा रही हैं। शादी-ब्याह हो, त्योहार हों या फिर भविष्य की आर्थिक सुरक्षा — भारतीय परिवार हमेशा Gold और Silver को प्राथमिकता देते आए हैं।
लेकिन अगर हम निवेश की दृष्टि से देखें, तो पिछले 21 वर्षों यानी 2005 से 2026 तक Gold और Silver दोनों ने जबरदस्त रिटर्न दिए हैं। कई बार Gold ने बाज़ी मारी, तो कई मौकों पर Silver ने तेज़ छलांग लगाई।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे:
2005 से 2026 तक Gold और Silver की कीमतों का सफर
दोनों धातुओं का तुलनात्मक विश्लेषण
किन कारणों से कीमतें बढ़ीं
निवेशकों को क्या सीख मिलती है
और भविष्य में इनका रुख कैसा हो सकता है
यह पोस्ट खासतौर पर उन लोगों के लिए है जो लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट, फाइनेंशियल प्लानिंग या कमोडिटी मार्केट में रुचि रखते हैं।
2005 से 2026 तक कीमतों का सफर
साल 2005 में भारत में Gold की कीमत लगभग ₹6,900 प्रति 10 ग्राम थी, जबकि Silver करीब ₹11,800 प्रति किलो के आसपास मिलती थी। उस समय बहुत कम लोगों ने सोचा होगा कि आने वाले दो दशकों में यही Gold ₹1,30,000 से ऊपर और Silver ₹2,50,000 के पार पहुंच जाएगी।
2008 की ग्लोबल मंदी ने पहली बार दुनिया को यह एहसास कराया कि Gold एक सुरक्षित निवेश है। जैसे-जैसे शेयर बाजार गिरे, निवेशकों का भरोसा सोने पर बढ़ता गया। इसके बाद 2011 तक Gold ने लगातार नई ऊंचाइयाँ बनाईं।
2013 से 2018 के बीच कीमतों में थोड़ी स्थिरता रही। इस दौरान Gold और Silver दोनों सीमित दायरे में घूमते रहे। लेकिन 2020 में कोरोना महामारी ने पूरी तस्वीर बदल दी।
कोविड के दौरान जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई, तब Gold और Silver ने ऐतिहासिक तेजी दिखाई। लोगों ने बड़े पैमाने पर सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया, जिसका सीधा फायदा इन दोनों धातुओं को मिला।
2024 से 2026 के बीच महंगाई, वैश्विक तनाव और रुपये की कमजोरी ने फिर से कीमतों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
Gold बनाम Silver: कौन रहा बेहतर निवेश?
अगर हम केवल रिटर्न की बात करें, तो दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया है।
Gold ने लगभग 20 गुना तक का लॉन्ग टर्म रिटर्न दिया। वहीं Silver ने कई बार Gold से ज्यादा तेज़ उछाल दिखाया, हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव भी ज्यादा रहा।
Gold को आमतौर पर “Safe Haven Asset” कहा जाता है। जब भी दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है — चाहे युद्ध हो, मंदी हो या महंगाई — निवेशक Gold की ओर भागते हैं।
Silver की खास बात यह है कि यह सिर्फ निवेश धातु नहीं, बल्कि एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और मेडिकल इंडस्ट्री में Silver की भारी मांग रहती है। यही वजह है कि जब इंडस्ट्रियल ग्रोथ तेज होती है, Silver भी तेजी से ऊपर जाता है।
सरल शब्दों में:
Gold = स्थिरता और सुरक्षा
Silver = ज्यादा जोखिम लेकिन ज्यादा संभावित मुनाफा
कीमतें बढ़ने के मुख्य कारण
Gold और Silver की कीमतों को प्रभावित करने वाले कई फैक्टर होते हैं।
सबसे पहला कारण है महंगाई। जब महंगाई बढ़ती है, तब लोग अपनी पूंजी बचाने के लिए Gold में निवेश करते हैं।
दूसरा बड़ा कारण है डॉलर और रुपये का रिश्ता। जैसे-जैसे रुपया कमजोर होता है, भारत में Gold और Silver महंगे हो जाते हैं।
तीसरा कारण है वैश्विक राजनीतिक तनाव। युद्ध, ट्रेड वॉर और अंतरराष्ट्रीय विवादों के समय Precious Metals की डिमांड बढ़ जाती है।
चौथा फैक्टर है सेंट्रल बैंकों की खरीदारी। पिछले कुछ वर्षों में कई देशों के सेंट्रल बैंकों ने बड़े पैमाने पर Gold खरीदा है।
Silver के मामले में इंडस्ट्रियल डिमांड बहुत अहम भूमिका निभाती है, खासकर ग्रीन एनर्जी और EV सेक्टर में।
निवेशकों के लिए सीख
अगर कोई निवेशक 2005 में Gold या Silver में नियमित निवेश करता, तो आज उसके पोर्टफोलियो की वैल्यू कई गुना बढ़ चुकी होती।
यह हमें सिखाता है कि:
लॉन्ग टर्म निवेश सबसे शक्तिशाली हथियार है
मार्केट के उतार-चढ़ाव से डरना नहीं चाहिए
डायवर्सिफिकेशन बहुत जरूरी है
सिर्फ Gold या सिर्फ Silver पर निर्भर रहना समझदारी नहीं है। बेहतर यही है कि दोनों को बैलेंस करके रखा जाए।
भविष्य का आउटलुक (2026 के बाद)
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी Gold अपनी स्थिर ग्रोथ बनाए रख सकता है। महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता इसके सपोर्ट में रहेंगी।
Silver के लिए भविष्य और भी दिलचस्प माना जा रहा है, क्योंकि सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
हालांकि Silver ज्यादा volatile रहेगा, लेकिन सही समय और सही रणनीति के साथ इसमें बड़े रिटर्न की संभावना बनी हुई है।
2005 से 2026 तक का डेटा साफ दिखाता है कि Gold और Silver दोनों ही भारत में शानदार निवेश विकल्प रहे हैं।
Gold ने जहां स्थिरता और सुरक्षा दी, वहीं Silver ने तेज़ ग्रोथ के मौके दिए।
अगर आप सुरक्षित निवेश चाहते हैं, तो Gold बेहतर है।
अगर आप थोड़ा जोखिम लेकर ज्यादा कमाई करना चाहते हैं, तो Silver अच्छा विकल्प हो सकता है।
सबसे समझदारी भरा कदम है — दोनों में निवेश करना।
Gold & Silver Price in India (2005–2026)
| Year | Gold (₹ / 10g) | Silver (₹ / kg) |
|---|---|---|
| 2005–06 | 6,901 | 11,829 |
| 2006–07 | 9,240 | 19,057 |
| 2007–08 | 9,996 | 19,427 |
| 2008–09 | 12,890 | 21,248 |
| 2009–10 | 15,756 | 25,321 |
| 2010–11 | 19,227 | 37,290 |
| 2011–12 | 25,722 | 57,316 |
| 2012–13 | 30,164 | 57,602 |
| 2013–14 | 29,190 | 46,637 |
| 2014–15 | 27,415 | 40,558 |
| 2015–16 | 26,534 | 36,318 |
| 2016–17 | 29,665 | 42,748 |
| 2017–18 | 29,300 | 39,072 |
| 2018–19 | 31,193 | 38,404 |
| 2019–20 | 37,018 | 42,514 |
| 2020–21 | 48,723 | 59,283 |
| 2021–22 | 48,000 | 65,426 |
| 2022–23 | 52,731 | 61,991 |
| 2023–24 | 60,624 | 72,243 |
| 2024–25 | 75,842 | 89,131 |
| 2025 | 1,26,815 | 1,69,095 |
| 2026 (Jan) | 1,39,967 | 2,55,625 |





